facebook new os

काफी समय से दुनिया भर में Android का मार्केट शेयर दूसरे किसी भी मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम के मुकाबले काफी ज्यादा रहा है. लेकिन क्या अब इसकी मोनॉपली खत्म होने वाली है? ऐसा इसलिए कहा जा रहा है, क्योंकि फेसबुक एक नए ऑपरेटिंग सिस्टम पर काम कर रहा है.फेसबुक के  यूजर अब  नई os   चाहते हे.

The Information की एक रिपोर्ट के मुताबिक माइक्रोसॉफ्ट के दिग्गज मार्क लुकोव्सकी के साथ मिल कर फेसबुक एक ऑपरेटिंग सिस्टम बना रहा है. देखने की बात ये हे कि मार्क लुकोव्सकी ने Windows NT ऑपरेटिंग सिस्टम बनाने में अहम रोल प्ले किया है.और अब फेसबुक के नई प्लान में os  को शामिल करके अब सोशल मीडिया में अपना पैर पसर ने को तैयार हे फेसबुक कला एक ड्रीम  सभी जगह में अपना नाम हो इसी की तैयारी करके आगे बढ़ रहा हे।

नए ऑपरेटिंग सिस्टम की न्यूज़  की खबर से भी मिलती है. The Verge की एक रिपोर्ट के मुताबिक Facebook के AR और VR हेड्स में से एक फीकसल कर्कपैट्रिक ने कहा है, ‘मुमकिन है कि फेसबुक के फ्यूचर हार्डवेयर के लिए गूगल सॉफ्टवेयर की जरूरत नहीं होगी, इसकी वजह से फेसबुक के हार्डवेयर पर गूगल का कंट्रोल कम या पूरी तरह से खत्म किया जा सकता है’ गूगल ने काफी मार्किट को अपने नाम किया हे गूगल ने हर जगह में अपना पर पेसया हे ad  को ज्यादा गूगल दिखता हे और एड्स देखने का प्लात्फ्रोम भी गूगल ही प्रोवाइड करता हे क्यों की गूगल अपने हर प्रोडक्ट में एड्स देने की सवलत दे रहा हे  .

दी इनफॉर्मेशन की रिपोर्ट में फेसबुक के हार्डवेयर हेड एंड्र्यू बॉसवर्थ के हवाले से बताया गया है कि कंपनी को ऐसा नहीं लगता है कि वो मार्केटप्लेस या प्रतिद्वंदियों पर भरोसा कर सकती है और इसलिए ही कंपनी ये काम खुद से करना चाहती है. फेसबुक ने अभी हल; ही में वीडियो   को  मॉनीटाइज़शन करने को ज्कः हे और काफी पैसा काम रहा हे फेसबुक क्रिएटर अभी काफी पैसा बना रहे हे

इस रिपोर्ट में ये भी दर्शाया गया है कि कंपनी फ्यूचर में ऐपल और गूगल की तरह ऑपरेटिंग सिस्टम ला सकती है. इससे पहले भी ब्लूमबर्ग और FT की रिपोर्ट में कहा गया था कि कंपनी कस्टम चिप हार्डवेयर और वॉयस असिस्टेंट पर काम कर रही है.

ऐसा नहीं है कि फेसबुक ने इससे पहले ऑपरेटिंग सिस्टम बनाया नहीं है, लेकिन कंपनी ने जब अपना ऑपरेटिंग सिस्टम बनाने की कोशिश की तो उस समय ये पिट गया था. क्योंकि ये भी एंड्रॉयड बेस्ड ही था जिसे 2013 में HTC के एक स्मार्टफोन में दिया गया था. लोगों ने इसे पसंद नहीं किया, क्योंकि प्राइवेसी को लेकर फेसबुक काफी पहले से ही सवालों के घेरे में है और  बावजूद इसके इस ऑपरेटिंग सिस्ट में प्राइवेसी को लेकर कुछ खास इंतजाम नहीं.

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